🌅 Short Story: “समुद्र का सबक”
Arjun रोज़ सुबह समुद्र किनारे walk करता था।
एक दिन उसने देखा—एक छोटी लड़की Meera अपनी चप्पल हाथ में लिए रो रही है।
Arjun ने पूछा,
“क्यों रो रही हो?”
Meera ने पैर दिखाए — दोनों एड़ियों पर लाल निशान थे।
“ये चप्पल नई है… पर ये मुझे बहुत hurt कर रही है,” वो बोली।
Arjun ने उसकी चप्पल हाथ में ली। चप्पल बहुत सुंदर थी—trendy design, bright colour, देखने में perfect…
पर size छोटी थी।
Arjun ने कहा,
“ये तुम्हारे size की नहीं है।”
Meera ने जवाब दिया,
“पर मम्मी कहती हैं ये सुंदर है और महंगी भी! इसलिए पहननी पड़ेगी…”
Arjun कुछ पल चुप रहा। फिर बोला,
“सुंदर चीज़ें हमेशा सही नहीं होतीं।
और सही चीज़ें हमेशा सुंदर नहीं होतीं।
अगर ये तुम्हें hurt कर रही है, तो ये तुम्हारे लिए नहीं बनी।”
उन्होंने पास की दुकान से उसके size की simple, comfortable चप्पल खरीदी।
Meera ने पहनी और मुस्कुराई—
“अब दर्द नहीं!”
उसी वक्त Arjun को एहसास हुआ…
Meera की कहानी उसकी खुद की ज़िंदगी थी।
वो इतने सालों से ऐसे लोगों को पकड़े हुए था—
जो दिखने में perfect relationships थे,
perfect friendships थे,
perfect partnerships थे…
लेकिन दिल में सिर्फ दर्द देते थे।
सुंदर थे, पर उसके size के नहीं।
Arjun ने खुद से कहा—
“आज से जिन लोगों के साथ मेरा मन दर्द दे…
उनसे दूरी बनाऊँगा।
क्योंकि shoes and people—
अगर वो hurt करें,
तो वो मेरे size के कभी थे ही नहीं।”
उस दिन समुद्र ने उसे एक अनमोल सबक दिया—
ज़िंदगी में हमेशा comfort चुनो या न चुनो लेकिन हमेशा दर्द देने वाली चीज़ें चाहे कितनी भी महंगी क्यों न हों, उन्हें बदल डालो, वो तुम्हारे लिए बनी ही नहीं हैं।

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